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किन रुनु एउटा टाढा भयो भनेर
गति छाडी देउता छाडा भयो भनेर
रोपेको नि फूलै हो, फुलेको नि फूलै हो
स्वधर्म छोडी तिखो काँढा भयो भनेर
मायाको पाथीमुरी दिँदादिँदै निठुरी
सुनको पछि लागेर बाँडा भयो भनेर
पुजिएको अहंले साइतको घडा त्यो
आफैँ ढलेर रित्तो भाँडा भयो भनेर
आफ्ना अनेकौँ हुन्छन् आफ्नो बनाउन जाने
रोकिन्न नदी सामु डाँडा भयो भनेर ।
i like the way you have given a glimpse of tatein this
keep it up
hope to read more