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मूलढोकाबाट पस्दा शुभ्र तिम्रो नाम देखेँ
नाम हेर्दै भित्र जाँदा नित्य नौलो धाम देखेँ
कल्पनाको स्वर्ग हो या हो कि मेरै स्वप्न देश
तारकाका बीच यौटा स्वर्ण फुल्ने गाम देखेँ
शङ्ख-घण्टा बज्न थाले, गुँज्न थाले सामगान
अञ्जलीमा पुष्पगुच्छा भक्तजनको लाम देखेँ
एउटैमा सृष्टि सारा अट्न सक्ने रूप कस्तो
अर्धस्वप्नाबीच जस्तो लाग्छ मेरो राम देखेँ ।
2.
पिई आँसु पीडा लुकायौ मलाई
दुःखीभित्र आफै दुखायौँ मलाई
तिमीभित्र फुल्ने मीठो कल्पना थ्यौ
सुकीभित्र आफै सुकायौ मलाई
कतै दूर पुग्ने पुराना कुरा थे
रूकीभित्र आफै रूकायौ मलाई
पूरा गर्छु भन्ने दिलासा मरे के ?
चुकीभित्र आफै चुकायौ मलाई ।
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