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हरेक सिजनमा, अन्तरालमा मनाइन्छ
शहरमा बिजय उत्सब
दगुर्छ बिजय जुलुस
बाजा गाजा को साथ
जिन्दाबाद ! मुर्दाबाद !
रथिहरु
नायक हरु
किच्चिएका छन अबिर ले
फूल मालाले
जीत हो ।
अमर रहोस् !
हरेक मौसममा उस्तै जुलुश
अनी
नयाँरथी महारथी हरु
अबिर माला ,
फेरी जिन्दबाद ! मुर्दाबाद !
….जीत हो ।
अमर रहोस् !
आज
शहरमा फेरी बिजय उत्सब मनाइयको छ
फेरी जितको खुशीयाली छ
उस्तै बाजा गाजा अबिर माला
आधा सताब्दी देखी उस्तै बिजय जुलुस देखेर
तीन पुश्ता उसरी नै हिँडेको देखेर
शहर र मान्छे पटक्कै बुझ्न नसकी
धरहरा यक्ष प्रश्न गर्छ
यो सधैं यस्तै जीत हो भने हार कस्को भो ?
यो अन्तिम बिजय जुलुश हो कि
क्रमश…… को एक ?
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