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सबैले छानेर छोडेको साडी जस्तै
गतिभूलि ठोक्किएको गाडी जस्तै
दुनियाँको आँखामा छारो हालेर
प्रेमी प्रेमीका लुक्ने झाडी जस्तै
बिग्रीएर भत्किएर अलपत्र परेको
इतिहास हराएको सिंधुलीमाडी जस्तै
प्रधानमंत्री ज्यू ! बेहाल भो देश नेपाल
पापी बगरेले घिस्साएको पाडी जस्तै
I like this satiric poem; keep on writing.